प्राण साहब को मेरी श्रद्धांजलि

Pran_Diamond_comics

प्राण साहब का निधन हो गया बीती रात । शोकाकुल हूँ थोड़ा सा । कल्पना की अमिट छाप से उन्होंने पता नहीं कितनों का बचपन संजोया था । महज़ ४ साल की उम्र से ही पता चल चुका था की कंप्यूटर नामक वस्तु होती है जिससे कहीं तेज चाचा जी का दिमाग चलता है , वहीँ साबू की डाइट को लेकर अचरज होता था । मुझे साबू ने सिखाया की बेसन के लड्डू कितने स्वादिष्ट होते हैं

और भी थे; रमन, चन्नी चाची, बिल्लू , पिंकी और न जाने क्या क्या । अब सिर्फ एक इच्छा थी की दिल्ली में रहते उनसे कभी मुलाक़ात हो जाए । साल बीत गए और अचानक प्राण जी भी देह त्याग दिए । समय छलिया होता है ।

आज भले ही दर्जनो पब्लिशिंग हाउसेस पनप गए हैं , जो हर तरह का मसाला परोसना चाहते हैं । एक प्राण थे ; जिनकी कॉमिक एक 4 साल का बच्चा हो या 84 साल के उम्रदराज़ व्यक्ति विशेष , हर कोई उतने ही चाव से पढ़ना पसंद करता था ।
जिस वक़्त उन्होंने कॉमिक की मुहीम छेड़ी थी, बहुत बड़ा रिस्क लिया था । गिनी चुनी पब्लिकेशन्स के कॉमिक प्रकाशित होते थे।

प्राण साहब का भरोसा, कला को नया आयाम देने में आखिरकार सक्षम रहा ।

P.S. –
Maurice Horn notes that Pran has been given the title of “Walt Disney of India” in The World Encyclopedia of Comics.[7] The Chacha Chaudhary strips find permanent place inInternational Museum of Cartoon Art, USA. -Wikipedia